Wednesday, June 11, 2008

मीडिया पर साई कृपा

धर्म आस्था से जुड़ा है। हर इंसान की आस्था पर परम्पराएं भी अपना असर छोडती हैं। अक्सर परम्परा और मान्यताएँ धर्म से जुड़ती हैं। कभी धर्म इनसे मजबूत होता है तो कभी खोखला लेकिन कुछ मान्यताएँ धर्म से ऊपर होती हैं। कोई धर्म इसमे रोड़ा नही बनता इसी तरह कुछ ऐसी शक्सियत होती हैं जो धर्म से भी कहीं ऊपर होती हैं। मौजूदा दौर में बाबा रामदेव उन्हीं में से एक हैं।
वैसे साई बाबा की भी महिमा और प्रसिदी किसी से छुपी नही। सालों से साई अपनी कृपा लाखों भक्तों पर करते रहे हैं। अब बारी इल्क्ट्रोनिक मीडिया यानि बुद्धू बक्से की है। साई की पूरी कृपा इन दिनों शायद इन्ही पर दिखती है। कुछ दिन पहले मुख्यत दो हिन्दी न्यूज़ चैनल्स पर साई बाबा पर आधारित कार्यक्रम शुरू हुए। साई की महिमा का बखान बड़े ही रोचक तरीके से किया जाने लगा। जगजीत सिंह के गाने और ग्राफिक्स के शानदार इस्तेमाल से साई की महिमा में चार चाँद लगाते चैनल्स में से एक अचानक साई की विडियो भी लेकर पेश हुए। पूरे दिन साई की विडियो चैनल पर चलती रही। बाकी चैनल्स ने जैसे ख़ुद को ठगा सा महसूस किया। टी आर पी की रेस में ख़ुद को पीछे देखते चैनल्स में अचानक पत्रकारिता जगी। सबसे पहले और सबसे तेज़ ख़बर दिखाने वाले चैनल विडियो की हकीकत के साथ सामने आये। साबित किया कि विडियो झूठा है और दूसरा चैनल लोगों कि आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहा है। धीरे धीरे बाकी चैनल्स को भी अपने वजूद का अहसास हुआ। इस ख़बर पर सब "खेलने" लगे। तेरी कमीज़ मेरी से ज्यादा सफ़ेद कैसे? इस को लेकर भयंकर घमासान दिखा। आखिरकार वही हुआ जो समझदार मीडिया का एक तबका चाहता था।

इन सबके बीच कुछ सवाल अनसुलझे रह गए। मसलन -
क्या किसी चैनल को लोगों की धार्मिक आस्था से खेलने का हक़ है?
क्या कोई चैनल किसी वेबसाइट की विडियो को आधार बना कर ख़बर दिखा सकता है?
क्या किसी चैनल को दूसरे चैनल की इस तरह भर्त्सना करना जायज़ है?
क्या न्यूज़ चैनल्स के पास ख़बरों के नाम पर धर्म आधारित कार्यक्रम ही बचे हैं?
अगर हाँ तो न्यूज़ चैनल्स और धार्मिक चैनल्स के बीच अन्तर क्या रहा?
ऐसे कुछ और सबाल जिन का जिक्र करना ठीक न हो लेकिन चैनल्स की इस लड़ाई के बीच साई की कृपा हर चैनल पर टी आर पी के लिहाज़ से तो हो ही गई। वैसे न्यूज़ चैनल्स को और चाहिए भी क्या....

अनुराग

2 comments:

Hrusikesh Das said...

hum bhi yehi soch rahe the yar....kyun? kyun hai yesa......

kahi-ankahi said...

Ab news channel; news channel kahan rahe Anurag Bhai! News channels me hame aaj jo dekhane mil raha hai - jaise - laughter challengers ki mimicry, Khali jaise mahabaliyon ki 24 ghanto ki dincharya, jyotishiyon ki bhavishyavaaniyan jisame 4 alag-alag jyotishi ek hi din me hamari 4 alag-alag rashifal bata sakte hain! Bhut-pret aur naag-nagin ke kisse logon ko hairan, pareshaan kar rahe hain. Ab news channel 'Satyakatha' aur 'Manohar Kahaniyaan' ka video sanskaran ho gai hain jisame masaaledaar apradh kathaen dilchasp dhang se parose jaate hain. Yah bhartiya media ka bahut bada durbhagya hai ki kuchh saalo phale tak jis media ko samaaj se andhvisvaas aur agyaanta mitaane ka ek sashakt aur prabhaavi maadhyam maana jaata tha, vahi media (electronic media) aaj tamaam tarah ke andhvishvaas aur paakhand failaane ke lie overtime karte dikhati hain.