बृहस्पतिवार, 6 मई 2010

राजनीती का शुद्धिकरण





मायावती हमेशा सुर्ख़ियों में रहना जानती हैं। मूर्तियों और पार्कों का निर्माण, सर्वोच्च न्यायालय की दखल, निर्माण पर अलग सुरक्षा व्यवस्था , अलग अलग मुद्दों पर केंद्र से तनातनी लेकिन बाद में कटौती प्रस्ताव पर सरकार को समर्थन। इस सबके बाद मायावती ने अब राजनीती के शुद्धिकरण की राह पकड़ी है। अच्छा है। देर आये दुरुस्त आये तो कहा ही जा सकता है। पार्टी के ऐसे सदस्य जिनका कल अपराध से जुड़ा रहा है। उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने की शुरुआत की गयी है। तकरीबन ५०० कार्यकर्ताओं को हाल ही में निकाला भी गया। जिन नेताओं पर बाहर निकालने का जिम्मा था...अपराधी पाने पर उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। यानि एक सख्त प्रशासक का उनका पुराना रूप फिर सामने आ रहा है लेकिन इस बार गाज़ अधिकारीयों पर नहीं नेता पर गिरी है।

लेकिन कुछ सवाल ज़ेहन में हैं। मसलन पूर्ण बहुमत हासिल कर सत्ता में आई मायावती क्या उन विधायकों पर भी गाज़ गिराएंगी? जिनके समर्थन से उनकी सरकार उत्तर प्रदेश में ५ साल पूरे करने का सपना देख रही है। बसपा के कुल २०६ में से ७० विधायकों का इतिहास आपराधिक रहा है। इनमें से कई जेल की हवा खा चुके हैं या खा रहे हैं। यह आंकड़े ADR ने जुटाए हैं।

विधायकों के बाद लाल बत्ती कार में घूमते उन काबीना मंत्रियों पर भी क्या वो ही नियम लागू होंगे जो एक साधारण बसपा कार्यकर्ता पर लागू होते दिख रहे है? २००७ में सत्ता पर काबिज़ होते वक़्त मायावती की कैबिनेट में करीब २ दर्जन आपराधिक छवि के मंत्री थे। इनके अलावा संसद में आये ''माननीयों'' पर भी क्या कुछ सख्त कदम उठेंगे? अगर उनका दामन दागदार रहा है तो...

इन सबके बीच ख़याल आता है की खुद बसपा सुप्रीमो मायावती भी तो सी बी आई के शिकंजे में हैं। तो क्या वो भी राजनीती से संन्यास???? नहीं- नहीं ऐसा तो हो ही नहीं सकता, क्योंकि मायावती के लिए दिल्ली अभी दूर है.....और उनके राजनितिक सफ़र की मंजिल भी शायद यही तो है!!!

1 टिप्पणियाँ:

Venudhar routiya ने कहा…

Bahut badiya sir g, bahut achha laga, aisa likhte rahe, hume bhi kuch sikhne ko milega.